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RT @Ahmad_Shakeel: RT @Ahmad_Shakeel: ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है। ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जायेगा।

RT @Ahmad_Shakeel: RT @Ahmad_Shakeel: ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है। ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जायेगा।

RT @Ahmad_Shakeel: RT @Ahmad_Shakeel: ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है। ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जायेगा।

Shakeel Ahmad (india) tweeted :

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है। ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जायेगा।